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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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सञ्जय़ उवाच
नैव दैवं न गान्धर्वं नासुरोरगराक्षसम् |  ४९   क
तादृशं भुवि वा युद्धं दिवि वा श्रुतमित्युत ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति