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अनुशासन पर्व
अध्याय ३७
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युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वं वा भवेत्पात्रमथ वापि चिरोषितम् |  १   क
दूरादभ्यागतं वापि किं पात्रं स्यात्पितामह ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति