आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३७

व्रह्मो उवाच

इदं मे स्यादिदं मे स्यात्स्नेहो गुणसमुद्भवः |  ११   क
अभिद्रोहस्तथा माय़ा निकृतिर्मान एव च ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति