आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३७

व्रह्मो उवाच

परिचर्या च शुश्रूषा सेवा तृष्णा व्यपाश्रय़ः |  ७   क
व्यूहोऽनय़ः प्रमादश्च परितापः परिग्रहः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति