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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य भार्याशतमिदं पुत्रशोकसमाहतम् |  १२   क
पुनः पुनर्वर्धय़ानं शोकं राज्ञो ममैव च |  १२   ख
तेनारम्भेण महता मामुपास्ते महामुने ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति