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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
लोकानन्यान्समर्थोऽसि स्रष्टुं सर्वांस्तपोवलात् |  ६   क
किमु लोकान्तरगतान्राज्ञो दर्शय़ितुं सुतान् ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति