वन पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

अमर्षी नित्यसंहृष्टस्तत्र कर्णो महारथः |  १६   क
सर्वास्त्रविदनाधृष्य अभेद्यकवचावृतः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति