वन पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

एवमेतन्महावाहो यथा वदसि भारत |  ३   क
इदमन्यत्समाधत्स्व वाक्यं मे वाक्यकोविद ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति