वन पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

वनादस्माच्च कौन्तेय़ वनमन्यद्विचिन्त्यताम् |  ३१   क
निवासार्थाय़ यद्युक्तं भवेद्वः पृथिवीपते ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति