वन पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

स व्यासवाक्यमुदितो वनाद्द्वैतवनात्ततः |  ३७   क
यय़ौ सरस्वतीतीरे काम्यकं नाम काननम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति