menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
लोकय़ज्ञः क्रिय़ाय़ज्ञो गृहय़ज्ञः सनातनः |  ५   क
पञ्चभूतमय़ो यज्ञो नृय़ज्ञश्चैव पञ्चमः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति