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शल्य पर्व
अध्याय ५६
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सञ्जय़ उवाच
उपसृत्य तु राजानं गदामोक्षविशारदः |  ५२   क
आविध्यत गदां राजन्समुद्दिश्य सुतं तव ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति