कर्ण पर्व  अध्याय ३७

सञ्जय़ उवाच

स वानरवरो राजन्विश्वकर्मकृतो महान् |  ८   क
ननाद सुमहन्नादं भीषय़न्वै ननर्द च ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति