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शल्य पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य यज्ञस्य सम्पत्त्या तुतुषुर्देवता अपि |  १०   क
विस्मय़ं परमं जग्मुः किमु मानुषय़ोनय़ः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति