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शल्य पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
नैमिषे मुनय़ो राजन्समागम्य समासते |  १५   क
तत्र चित्राः कथा ह्यासन्वेदं प्रति जनेश्वर ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति