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शल्य पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र ते मुनय़ो ह्यासन्नानास्वाध्याय़वेदिनः |  १६   क
ते समागम्य मुनय़ः सस्मरुर्वै सरस्वतीम् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति