शल्य पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

विशालां तु गय़ेष्वाहुरृषय़ः संशितव्रताः |  २०   क
सरित्सा हिमवत्पार्श्वात्प्रसूता शीघ्रगामिनी ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति