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शल्य पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सरिच्छ्रेष्ठा तं देशमृषिकारणात् |  २३   क
पूज्यमाना मुनिगणैर्वल्कलाजिनसंवृतैः |  २३   ख
मनोह्रदेति विख्याता सा हि तैर्मनसा हृता ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति