आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

देवर्षय़ो ह्यत्र पुण्या व्रह्मराजर्षय़स्तथा |  १९२   क
कीर्त्यन्ते शुभकर्माणस्तथा यक्षमहोरगाः ||  १९२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति