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आदि पर्व
अध्याय ५३
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सूत उवाच
लोहिताक्षाय़ सूताय़ तथा स्थपतय़े विभुः |  १२   क
येनोक्तं तत्र सत्राग्रे यज्ञस्य विनिवर्तनम् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति