शान्ति पर्व  अध्याय ३८

वैशम्पाय़न उवाच

घातय़ित्वा तमेवाजौ छलेनाजिह्मय़ोधिनम् |  १९   क
उपसम्प्रष्टुमर्हामि तमहं केन हेतुना ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति