शान्ति पर्व  अध्याय ३८

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्तं नृपतिश्रेष्ठं चातुर्वर्ण्यहितेप्सय़ा |  २०   क
पुनराह महावाहुर्यदुश्रेष्ठो महाद्युतिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति