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शान्ति पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रिय़ार्थमपि चैतेषां व्राह्मणानां महात्मनाम् |  २४   क
निय़ोगादस्य च गुरोर्व्यासस्यामिततेजसः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति