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शान्ति पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
ते पञ्च रथमास्थाय़ भ्रातरः समलङ्कृताः |  ३७   क
भूतानीव समस्तानि राजन्ददृशिरे तदा ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति