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शान्ति पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
आस्थाय़ तु रथं शुभ्रं युक्तमश्वैर्महाजवैः |  ३८   क
अन्वय़ात्पृष्ठतो राजन्युय़ुत्सुः पाण्डवाग्रजम् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति