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शान्ति पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
अभिय़ाने तु पार्थस्य नरैर्नगरवासिभिः |  ४५   क
नगरं राजमार्गश्च यथावत्समलङ्कृतम् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति