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अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
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पञ्चचूडो उवाच
यदि पुंसां गतिर्व्रह्म कथञ्चिन्नोपपद्यते |  २२   क
अप्यन्योन्यं प्रवर्तन्ते न हि तिष्ठन्ति भर्तृषु ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति