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उद्योग पर्व
अध्याय ९०
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वैशम्पाय़न उवाच
एतैश्चान्यैश्च वहुभिर्दोषैरेष समन्वितः |  ५   क
त्वय़ोच्यमानः श्रेय़ोऽपि संरम्भान्न ग्रहीष्यति ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति