वन पर्व  अध्याय ३८

वैशम्पाय़न उवाच

स मुहूर्तमिव ध्यात्वा वनवासमरिन्दमः |  ३   क
धनञ्जय़ं धर्मराजो रहसीदमुवाच ह ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति