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वन पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
यदा द्रक्ष्यसि भूतेशं त्र्यक्षं शूलधरं शिवम् |  ४३   क
तदा दातास्मि ते तात दिव्यान्यस्त्राणि सर्वशः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति