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विराट पर्व
अध्याय ३८
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उत्तर उवाच
निर्दिशस्व यथातत्त्वं मय़ा पृष्टा वृहन्नडे |  ३५   क
विस्मय़ो मे परो जातो दृष्ट्वा सर्वमिदं महत् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति