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विराट पर्व
अध्याय ३८
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वृहन्नडो उवाच
यन्मां पूर्वमिहापृच्छः शत्रुसेनानिवर्हणम् |  ३६   क
गाण्डीवमेतत्पार्थस्य लोकेषु विदितं धनुः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति