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विराट पर्व
अध्याय ३८
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वृहन्नडो उवाच
यत्तच्छतसहस्रेण संमितं राष्ट्रवर्धनम् |  ३८   क
येन देवान्मनुष्यांश्च पार्थो विषहते मृधे ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति