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विराट पर्व
अध्याय ३८
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वृहन्नडो उवाच
ततोऽनन्तरमेवाथ प्रजापतिरधारय़त् |  ४०   क
त्रीणि पञ्चशतं चैव शक्रोऽशीति च पञ्च च ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति