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विराट पर्व
अध्याय ३८
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वृहन्नडो उवाच
ये त्विमे क्षुरसङ्काशाः सहस्रा लोमवाहिनः |  ४७   क
एतेऽर्जुनस्य वैराटे शराः सर्पविषोपमाः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति