उद्योग पर्व  अध्याय १७५

होत्रवाहन उवाच

मय़ा शाल्वपतिर्वीर मनसाभिवृतः पतिः |  २२   क
न मामर्हसि धर्मज्ञ परचित्तां प्रदापितुम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति