शल्य पर्व  अध्याय ३८

वैशम्पाय़न उवाच

स पूतिना विस्रवता वेदनार्तो महामुनिः |  १३   क
जगाम सर्वतीर्थानि पृथिव्यामिति नः श्रुतम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति