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शल्य पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वानुपादाय़ तनय़ान्वै महातपाः |  २५   क
रुषङ्गुरव्रवीत्तत्र नय़ध्वं मा पृथूदकम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति