सभा पर्व  अध्याय ३९

शिशुपाल उवाच

भुज्यतामिति तेनोक्ताः कृष्णभीमधनञ्जय़ाः |  ५   क
जरासन्धेन कौरव्य कृष्णेन विकृतं कृतम् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति