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वन पर्व
अध्याय ३९
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो महर्षय़ः सर्वे जग्मुर्देवं पिनाकिनम् |  २५   क
शितिकण्ठं महाभागं प्रणिपत्य प्रसाद्य च |  २५   ख
सर्वे निवेदय़ामासुः कर्म तत्फल्गुनस्य ह ||  २५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति