कर्ण पर्व  अध्याय ३९

सञ्जय़ उवाच

ततो धर्मसुतो राजन्प्रगृह्यान्यन्महद्धनुः |  २०   क
द्रौणिं विव्याध सप्तत्या वाह्वोरुरसि चार्दय़त् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति