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शल्य पर्व
अध्याय ३९
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः शुश्राव राजा स राक्षसेभ्यो महाभय़म् |  १७   क
निर्ययौ नगराच्चापि चतुरङ्गवलान्वितः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति