आदि पर्व  अध्याय ४

सूत उवाच

यत्र व्रह्मर्षय़ः सिद्धास्त आसीना यतव्रताः |  १०   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति