menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
कृप उवाच
ते वय़ं सहितास्तात सर्वाञ्शत्रून्समागतान् |  ११   क
प्रसह्य समरे हत्वा प्रीतिं प्राप्स्याम पुष्कलाम् |  ११   ख
विश्रमस्व त्वमव्यग्रः स्वप चेमां निशां सुखम् ||  ११   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति