उद्योग पर्व  अध्याय १५४

वैशम्पाय़न उवाच

नीलकौशेय़वसनः कैलासशिखरोपमः |  १८   क
सिंहखेलगतिः श्रीमान्मदरक्तान्तलोचनः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति