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वन पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततश्चिन्तय़मानस्य गुडाकेशस्य धीमतः |  २   क
रथो मातलिसंय़ुक्त आजगाम महाप्रभः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति