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अनुशासन पर्व
अध्याय ४
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भीष्म उवाच
गुणवन्तमपत्यं वै त्वं च सा जनय़िष्यथः |  २५   क
जनन्यास्तव कल्याणि मा भूद्वै प्रणय़ोऽन्यथा ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति