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वन पर्व
अध्याय २३३
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वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञस्तु वचनं श्रुत्वा धर्मराजस्य धीमतः |  ९   क
क्रमेण मृदुना युद्धमुपक्रामन्त भारत ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति