अनुशासन पर्व  अध्याय ४

भीष्म उवाच

व्यत्यासं वृक्षय़ोश्चापि करवाव शुचिस्मिते |  ३२   क
यदि प्रमाणं वचनं मम मातुरनिन्दिते ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति