अनुशासन पर्व  अध्याय ४

भीष्म उवाच

कामं ममोग्रकर्मा वै पौत्रो भवितुमर्हति |  ४४   क
न तु मे स्यात्सुतो व्रह्मन्नेष मे दीय़तां वरः ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति